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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा सियासी ड्रामा सामने आया है, जहां शरद पवार की पार्टी NCP में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के आठ में से छह सांसद पाला बदलने को तैयार हैं, जबकि दस में से छह विधायक भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, शरद पवार को अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहारा है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी ऐसा काम नहीं होना चाहिए जिससे शरद पवार को परेशानी हो। यही वजह है कि अब तक पार्टी पूरी तरह नहीं टूटी है। इस बीच, शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार गुट के बीच विलय की शर्तों को लेकर खींचतान जारी है। सुनेत्रा पवार बिना शर्त विलय चाहती हैं, जिसमें वे राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री बनी रहेंगी। साथ ही, वे चाहती हैं कि उनके बेटे पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। वहीं, शरद पवार खेमा चाहता है कि सुप्रिया सुले को दिल्ली में मंत्री बनाया जाए और राज्य में जितेंद्र पाटिल को वित्त मंत्रालय दिया जाए। एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे जैसे नेता शरद पवार की पार्टी को तुरंत तोड़कर उनके सांसदों-विधायकों को अपनी पार्टी या भाजपा में शामिल कराने के पक्ष में हैं। यह मराठा वोट के एकछत्र नेता बनने की जंग है। फिलहाल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर दोनों गुटों को संभालने की जिम्मेदारी है। देखना है कि यह ड्रामा कब तक चलता रहता है। Article and image source: nayaindia.com
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा सियासी ड्रामा सामने आया है, जहां शरद पवार की पार्टी NCP में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के आठ में से छह सांसद पाला बदलने को तैयार हैं, जबकि दस में से छह विधायक भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, शरद पवार को अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहारा है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि कोई भी ऐसा काम नहीं होना चाहिए जिससे शरद पवार को परेशानी हो। यही वजह है कि अब तक पार्टी पूरी तरह नहीं टूटी है।
इस बीच, शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार गुट के बीच विलय की शर्तों को लेकर खींचतान जारी है। सुनेत्रा पवार बिना शर्त विलय चाहती हैं, जिसमें वे राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री बनी रहेंगी। साथ ही, वे चाहती हैं कि उनके बेटे पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। वहीं, शरद पवार खेमा चाहता है कि सुप्रिया सुले को दिल्ली में मंत्री बनाया जाए और राज्य में जितेंद्र पाटिल को वित्त मंत्रालय दिया जाए।
एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे जैसे नेता शरद पवार की पार्टी को तुरंत तोड़कर उनके सांसदों-विधायकों को अपनी पार्टी या भाजपा में शामिल कराने के पक्ष में हैं। यह मराठा वोट के एकछत्र नेता बनने की जंग है। फिलहाल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर दोनों गुटों को संभालने की जिम्मेदारी है। देखना है कि यह ड्रामा कब तक चलता रहता है।
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